शालिनी चौहान
जैसे जैसे आज समाज और देश उन्नति कर रहे हैं उस तरह से लड़कियों की दशा में कोई परिवर्तन नही हुआ हैं। देखा जाए तो आज की लड़कियां लड़कों से कम नही हैं बल्कि हर क्षेत्र में लड़कों से आगे ही हैं फिर चाहे वह देश की रक्षा का मौका हो या देश के सम्मान से जुड़ा हुआ अवसर। आज लड़कियां देश की तीनों सेनाओं में उच्च पद पर और लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अग्रिम मोर्चे पर तैनात हैं। विश्व मंच पर खेलों में सवर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। राजनीति, प्रशासनिक, व्यावसायिक एवं सामाजिक हर क्षेत्र में बेटियों ने अपनी अमिट छाप छोड़ी हैं फिर भी बेटी का जब विवाह होता हैं तब उस जगह वह मार खा जाती हैं और उसकी उच्चता और योग्यता को नजरअंदाज करके दहेज की मांग की जाती हैं। दहेज भी थोड़ा बहुत नही बल्कि लड़के पक्ष के लोग बेटे के जन्म से लेकर उसके कमाने तक का सारा पैसा ब्याज सहित लड़की पक्ष से वसूल करने की मंशा रखते हैं।
हर बाप अपने बेटी के जीवन के लिए अच्छा लड़का देखता हैं लेकिन लड़कों की कीमत आज बाजार में उस सामान के भाव गयी हैं जैसे सामान की गुणवत्ता वैसे ही सामान की कघमत। ससुराल पक्ष कभी लड़की के संस्कार, व्यवहार नही देखता उसको तो केवल दहेज में मतलब होता हैं जब यही लड़कियां ससुराल में काम करने को मना करती हैं, किसी का आदर सम्मान नही करतीं, हर बात का जवाब देती हैं तो यही ससुराल वाले बोलते हैं कि क्या यही तुम्हारे माँ बाप ने संस्कार दिए थे। शायद ससुराल वाले ये भूल जाते हैं कि उन्होंने अपने बेटे को बाजार के भाव लड़की पक्ष को बेच दिया था। दहेज के रूप में उनकों मुंह मांगी रकम दी गयी थींतो किस हक से ससुराल पक्ष लड़की पर अपना हक जमाता हैं।
दहेज के लोभियों के लिए समाज में एक कहावत हैं अगर हर लड़की का बाप इस कहावत पर अमल कर ले तो यें दहेज मांगने वालों के मुंह बन्द हो जाएंगे।
लड़की तो गरीब की भी ब्याह दी जाती लड़की हैं। और कुंवारा अमीर का लड़का भी रह जाता हैं।
हर लड़की को अपने परिवार के हालात के बारे में पता होता हैं इसलिए हर बेटी को ये संकल्प लेना चाहिए कि वह दहेज रहित विवाह करेंगी। भले पूरी जिन्दगी कुंवारी रहूँ लेकिन अपने पिता को दहेज के लोभियों के आगे नहीं झुकने दूंगी। आज की शदी में सोशल मीडिया का बहुत बोल वाला हैं और दहेज मांगने वालों की जानकारी सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों में प्रकाशित करवा देनी चाहिए जिससे कोई भी लड़की ऐसे परिवार में शादी करने से मना कर दे जो दहेज मांगते हो। इन लोगो के हालात यें हो जाएंगे जब इनके बेटे से कोई शादी नही करेगा और लड़के की उम्र समय के साथ बढ़ती जाएंगी तो ये खुद लड़की पक्ष को दहेज देकर अपने बेटे के लिए लड़की माँगे फिर भी ऐसे लोगो से कोई विवाह नही करेगा। आजकल लड़कियां भी अपनी उम्र का हमसफर चाहती हैं। इसका परिणाम समाज में ये निकल कर आएगा की लड़का पक्ष दहेज लेने से डरेगा। उसको इस बात का डर रहेगा कि दहेज मांगने वालों में उसके परिवार का नाम निकल गया तो कोई उसके बेटे से विवाह भी नहीं करेगा। सरकार को भी चाहिए कि वह विवाह के लिए एक ऐसे कानून का निर्माण करें जिसमे एक पिता जो भी सामान, सोना चांदी के जेवरात और नकदी पैसा अपनी बेटी को देता हैं उसको एक स्टाम्प पेपर पर लिखवाना अनिवार्य होना चाहिए और जब विवाह का पंजीकरण कराया जाए तब इस दहेज प्रमाण पत्र को लगाना अनिवार्य हो ताकि सब की सरकार की नजर में भी रहे कि क्या क्या सामान और कितनी का दिया गया हैं जिससे अगर भविष्य में लड़का पक्ष लड़की को दहेज के लिए परेशान करें और लड़की ऐसे परिवार से अलग होना चाहे तो वह सभी सामान की कघमत और जो कुछ भी लड़के पक्ष को दिया गया हो उसे मांग सके।
दहेज ना लेने में सबसे बड़ी भूमिका घर के बेटो की शामिल हैं अगर लड़के ही ये संकल्प ले ले कि उनको केवल लड़की चाहिए और कुछ नही लेना। फिर भी उनके परिवार वाले दहेज लेकर ही शादी करने को राजी हो तो वह शादी करने से ही मना कर दे। तभी ये समाज सुधरेगा। क्योंकि एक बेटी का जीवन आज के समय में बहुत ही कठिनाई से गुजरता हैं।
आइए हम सब मिलकर एक संकल्प लेना दहेज देगे और ना दहेज लेगे दहेज रहित विवाह की ओर एक कदम जरूर बढ़ाए।